झील झरना दरिया जंगल सहरा सहरा 'इश्क़ है

  - A R Sahil "Aleeg"

झील झरना दरिया जंगल सहरा सहरा 'इश्क़ है
जिस तरफ़ भी देखिए हर सम्त फैला 'इश्क़ है

आप चाहे लाख काबा-ओ-कलीसा छानिए
बस वहीं पर है ख़ुदा जिस दिल में बैठा 'इश्क़ है

जो यहाँ डूबा कभी उभरा नहीं है दोस्तो
काएनाती हर समुंदर से भी गहरा 'इश्क़ है

आ किसी दिन आ के इस को थोड़ी ठंडक बख़्श दे
मेरे दिल में एक मुद्दत से दहकता 'इश्क़ है

और दुनिया में कोई तदबीर दूजी है नहीं
आशिक़-ए-बीमार का बस इक मुदावा 'इश्क़ है

धड़कनों की है मसाजिद और है महबूब रब
मज़हब-ए-आशिक़ अगर है तो ये यकता 'इश्क़ है

दिल से दिल तक रहनुमाई कर रहा है हर घड़ी
हम दिवानों के क़बीलों का मसीहा 'इश्क़ है

आप कहने को कहे कुछ भी मगर सच है यही
देखने वालों ने तो हर शय में देखा 'इश्क़ है

मुझ से 'साहिल' पूछते हैं वो मेरे दिल में है क्या
मैं तो आशिक़ हूँ मेरी हर इक तमन्ना 'इश्क़ है

  - A R Sahil "Aleeg"

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