तमाम 'उम्र रहा है इसी सफ़र में ''इश्क़
नज़र तो आए कभी तेरी इस नज़र में ''इश्क़
रगों में यूँँ हैं रवाँ नफ़रतें कि पूछो मत
दिखाई देता नहीं अब किसी बशर में ''इश्क़
डगर डगर पे हसीनों के देखिए जल्वे
बदन बदन में महक है नज़र नज़र में ''इश्क़
सिवाए इसके सिखाया नहीं मुझे कुछ भी
ख़ुदा ने भेजा है भर कर मेरे हुनर में ''इश्क़
दिखाई कुछ भी नहीं देता इस के मारों को
बसा है ऐसे हसीनों की हर नज़र में ''इश्क़
हमारा ख़त जो पहुँचता जवाब भी आता
लगे है धूल ही खाया है डाक-घर में ''इश्क़
रहे है बाक़ी दिनों में ख़फ़ा ख़फ़ा सा वो
कभी कभार लड़ाता है साल भर में ''इश्क़
ये कामयाबी के नुस्खे़ मुझे न दे 'साहिल'
न दिल में ताब बची है मेरे न सर में 'इश्क़
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