ajnabi par hi faqat khaas inaayat karke | अजनबी पर ही फ़क़त ख़ास इनायत करके

  - Danish Balliavi

अजनबी पर ही फ़क़त ख़ास इनायत करके
मुझको अफ़सोस है जज़्बों से बग़ावत करके

मेरे दिल की ये तमन्ना थी उसे पाने की
हो गया मुझ सेे वो रुख़्सत यूँँ अदावत करके

ज़िंदगी भर मैं न कर पाऊँगा अपनी इज़्ज़त
ख़ुद से नाराज़ हूँ मैं उस से मुहब्बत करके

मैं वो शय हूँ जो क़यामत से भी लड़ सकता हूँ
वो बहुत ख़ुश है मेरा ज़ीस्त क़यामत करके

वो मेरा ख़ास अमानत था मगर ऐ 'दानिश'
छोड़ कर चल ही दिया मुझ सेे वो नफ़रत करके

  - Danish Balliavi

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