हो गया मुझ पे वो क़ुर्बान ख़ुदा ख़ैर करे
हो गई शहर में पहचान ख़ुदा ख़ैर करे
रफ़्ता रफ़्ता वो सनम पास मेरे आने लगा
देख कर मैं भी हूँ हैरान ख़ुदा ख़ैर करे
दोस्तों रात को रखता था मैं कुछ सिरहाने
मर गया दर्द का सामान ख़ुदा ख़ैर करे
अपने हाथों को मेरे दिल पे वो जब रखने लगा
मुश्किलें हो गई आसान ख़ुदा ख़ैर करे
उस को था रश्क मुहब्बत से मगर अब 'दानिश'
वो मुकम्मल हुआ शायान ख़ुदा ख़ैर करे
— Danish Balliavi















