हाँ 'इश्क़ में जब से मिरा दिल ये तुम्हारा हो गया
अफ़सोस तब से मौत का मुझ पे इशारा हो गया
आसान हरगिज़ भी नहीं है 'इश्क़ करना आशिक़ों
दिल टूटता है अब यहाँ ऐसा नज़ारा हो गया
लब ये तरसते हैं यूँँ तुम से बात करने के लिए
ऐसे ही मुर्शद ज़िंदगी का ये गुज़ारा हो गया
उसकी गली में राह में उसको बहुत ढूँढ़ा हूँ मैं
दिखता नहीं अब बेवफ़ा आँखों का तारा हो गया
फिर कोई लड़की ने नज़र डाली है बस उस पर ही तो
फिर दिल लगा ये 'इश्क़ ''दानिश'' को दुबारा हो गया
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