Meaning of

क़बा

qaba • قبا

वस्त्र; परिधान; चोगा

robe; garment; cloak

قبا; لباس; چغہ

Arabic

उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुखन में और फिर उस के बदन के वास्ते इक क़बा़ भी सी गई — Jaun Elia
ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं — Faiz Ahmad Faiz
तितलियाँ ख़ून से तर यूँँ ही नहीं फिरती बशर काँटे फूलों की क़बा ओढ़ के खिलते हैं यहाँ — Dharmesh bashar
रब्त इक़बाल से मेरा है न है मीर के साथ हाज़िर-ए-बज़्म हूँ मैं अपनी ही तहरीर के साथ — Moid Rahbar
हर एक शय से हसीं शय है ये मोहब्बत भी तराश दे जो ये पत्थर को भी ख़ुदा कर दे — Mohak Pandey
किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए — Ahmad Faraz
मीर के बा'द ग़ालिब ओ इक़बाल इक सदा, इक सदी में गुज़री है — Gulzar Dehlvi
ढूँढ़ता फिरता हूँ मैं 'इक़बाल' अपने आप को आप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूँ मैं — Allama Iqbal
अगर ख़ुदा बनते पत्थर को तराश के फिर तो हर इंसान ख़ुदा का ख़ुदा होता — Meenakshi Masoom

'क़बा' मूल रूप से एक वस्त्र को संदर्भित करता है, अक्सर एक चोगा या परिधान, जो सुरक्षा और पहचान का प्रतीक है। कविता में यह आत्म के स्तरों, व्यक्तित्व के आवरणों, और अपनापन की गर्माहट का रूपक बन जाता है।

कवि 'क़बा' का उपयोग पहचान, छिपाव, और परिचित भूमिकाओं की आरामदायकता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह उन बोझों का भी संकेत दे सकता है जिन्हें हम ढोते हैं।

'क़बा' आत्म को अर्थ के स्तरों में लपेटता है, एक काव्यात्मक वस्त्र जो पहचान और आत्मनिरीक्षण से बुना गया है।