Meaning of

क़ासिर

qasir • قاصر

अपर्याप्त; अधूरा; कमी

inadequate; insufficient; lacking

قاصر; ناکافی; کمی

Arabic

ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें — Ahmad Faraz
कोई मुँह फेर लेता है तो 'क़ासिर' अब शिकायत क्या तुझे किस ने कहा था आइने को तोड़ कर ले जा — Ghulam Mohammad Qasir
ग़म-ए-दुनिया से आगे कुछ नहीं है जहाँ तुम आशनाई कर रही हो — Rohit Gustakh
जिन की दर्द-भरी बातों से एक ज़माना राम हुआ 'क़ासिर' ऐसे फ़न-कारों की क़िस्मत में बन-बास रहा — Ghulam Mohammad Qasir
ग़म-ए-दुनिया से कहीं दूर ले जाएँ तुम को मिलिए फ़ुर्सत में कभी चाय पिलाएँ तुम को — Akash Rajpoot

'क़ासिर' शब्द अपर्याप्तता या कमी की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर मानव स्थिति की लालसा और हमेशा पर्याप्त न होने की भावना को दर्शाता है, अधूरी इच्छाओं के सार को पकड़ता है।

कवि 'क़ासिर' का उपयोग अधूरे संभावनाओं और पूर्णता की लालसा के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उन सपनों की उदासी को जागृत कर सकता है जो बस पहुंच से बाहर रहते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'क़ासिर' संपूर्णता की सार्वभौमिक खोज और अपूर्णता की मार्मिक सुंदरता के साथ गूंजता है।