Meaning of

ग़ुल

ghul • غل

कोलाहल; हलचल; भ्रम

uproar; tumult; confusion

ہنگامہ; شور; الجھن

Arabic

मैं किस से पूछूँ ये रस्ता दुरुस्त है कि ग़लत
जहाँ से कोई गुज़रता नहीं वहाँ हूँ मैं

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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं

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किताबें बंद कर के जब मैं बिस्तर पर पहुँचता हूँ
तुम्हारी याद भी आ कर बगल में लेट जाती है

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सब कर लेना लम्हे ज़ाया' मत करना
ग़लत जगह पर जज़्बे ज़ाया' मत करना

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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया
पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया

सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा
तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया

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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर
फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं

दिन में सौ बार याद करता हूँ
पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं

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ये गूँगों की महफ़िल है निकलना ही पड़ेगा
क्या इतनी ख़ता कम है कि हम बोल पड़े हैं

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तुझे किसी ने ग़लत कह दिया मेरे बारे
नहीं मियाँ मैं दिलों को दुखाने वाला नहीं

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तेरे वादे से प्यार है लेकिन
अपनी उम्मीद से नफ़रत है

पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी
शा'इरी दूसरी हिमाक़त है

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ख़मोशी तो यही बतला रही है
उदासी रास मुझ को आ रही है

मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था
वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है

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मैं किस से पूछूँ ये रस्ता दुरुस्त है कि ग़लत
जहाँ से कोई गुज़रता नहीं वहाँ हूँ मैं

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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं

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अपने मूल अर्थ में, 'ग़ुल' एक अराजक दृश्य की छवि प्रस्तुत करता है, जो शोर और अव्यवस्था से भरा होता है। कविता में, यह शब्द अक्सर व्यक्ति के भीतर की उथल-पुथल या प्रकृति की अराजक सुंदरता को दर्शाता है। यह आंतरिक अशांति और बाहरी अराजकता की बात करता है जो इसे प्रतिबिंबित करती है।

'ग़ुल' का उपयोग कवि भावनात्मक उथल-पुथल को दर्शाने के लिए करते हैं। यह प्रेम की अराजकता या परेशान मन की अव्यवस्था को चित्रित कर सकता है। अक्सर शांति के विपरीत, यह जीवन के अप्रत्याशित क्षणों की तीव्रता को उजागर करता है।

'ग़ुल' भीतर और बाहर के तूफान का प्रतीक है, उस अराजकता का प्रमाण जो हमें परिभाषित और परिष्कृत करती है।