Meaning of

ज़िस्म

zism • جسم

शरीर; आकृति; काया

body; form; physique

جسم; شکل; بدن

Arabic

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी

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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने
तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने

मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ
लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने

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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है

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रंग-ओ-रस की हवस और बस
मसअला दस्तरस और बस

यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की
एक नस टस से मस और बस

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ये जो है फूल हथेली पे इसे फूल न जान
मेरा दिल जिस्म से बाहर भी तो हो सकता है

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रूहों के पर्दा-पोश गुनाहों से बे-ख़बर
जिस्मों की नेकियाँ ही गिनाता रहा हूँ मैं

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लोग औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं
रुह भी होती है उस में ये कहाँ सोचते हैं

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दुख तो बहुत मिले हैं मोहब्बत नहीं मिली
या'नी कि जिस्म मिल गया औरत नहीं मिली

मुझ को पिता की आँख के आँसू तो मिल गए
मुझ को पिता से ज़ब्त की आदत नहीं मिली

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जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

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'ज़िस्म' शब्द भौतिक उपस्थिति और अस्तित्व के ठोस रूप को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर भौतिक और आध्यात्मिक, दृश्य और अदृश्य के बीच संबंध की खोज के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करता है।

कवि 'ज़िस्म' का उपयोग मानव अस्तित्व की द्वैतता, मांस और आत्मा के बीच तनाव, और भौतिक सुंदरता की क्षणभंगुरता को समझने के लिए करते हैं।

'ज़िस्म' की खोज में, कवि एक ऐसा दर्पण पाते हैं जो क्षणिक और शाश्वत दोनों को प्रतिबिंबित करता है।