Meaning of

जा़निब

zaanib • جانب

तरफ; दिशा; पहलू

side; direction; aspect

طرف; سمت; پہلو

Arabic

मेरी जानिब न बढ़ना अब मोहब्बत
मैं अब पहले से मुश्किल रास्ता हूँ

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अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफ़े आ रहे हैं
कि घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं

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इश्क़ अगर बढ़ता है तो फिर झगड़े भी तो बढ़ते हैं
आमदनी जब बढ़ती है तो ख़र्चे भी तो बढ़ते हैं

माना मंज़िल नहीं मिली है हम को लेकिन रोज़ाना
एक क़दम उस की जानिब हम आगे भी तो बढ़ते हैं

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मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

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तुझे ख़याल नहीं है सो हम बढ़ा रहे हैं
फिर इक दफ़ा तेरी ज़ानिब क़दम बढ़ा रहे हैं

बहुत से आए तुझे जीतने की ख़्वाहिश में
हम एक कोने में बैठे रक़म बढ़ा रहे हैं

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उस की जानिब से भी चाहा है बराबर ख़ुद को
मैं ने इक-तरफ़ा मुहब्बत तो कभी की ही नहीं

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ऐसे हँस हँस के न देखा करो सब की जानिब
लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं

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मैं खोया खोया सा तेरी छत की जानिब देख रहा हूँ
गीले कपड़े सूख रहे हैं, सूखी आँखें भीग रही हैं

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बद-नज़र उठने ही वाली थी किसी की जानिब
अपने बेटी का ख़याल आया तो दिल काँप गया

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सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा
मैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिर

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मेरी जानिब न बढ़ना अब मोहब्बत
मैं अब पहले से मुश्किल रास्ता हूँ

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अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफ़े आ रहे हैं
कि घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं

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'जा़निब' का मूल अर्थ है कोई तरफ या दिशा, जो अक्सर भौतिक या रूपकात्मक दिशा को दर्शाता है। कविता में, यह शब्द जीवन और अस्तित्व के विभिन्न पहलुओं की यात्रा या खोज को दर्शाता है।

'जा़निब' का उपयोग कवि अक्सर चुनाव और भाग्य के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह जीवन के मार्ग में एक मोड़ या विभाजन को दर्शा सकता है। यह शब्द गति और निर्णय की भावना को जागृत करता है, पाठकों को उनके द्वारा चुनी गई दिशाओं पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।

कविता में, 'जा़निब' जीवन के चौराहे का रूपक बन जाता है, आत्मनिरीक्षण और चुनाव का आग्रह करता है।