Meaning of

तरब

tarab • ورق

आनंद; उल्लास; परमानंद

joy; delight; ecstasy

خوشی; مسرت; وجد

Arabic

इश्क़ ओ वफ़ा के सारे वरक़ भूल गए हैं
हम पर किसी का कितना था हक़ भूल गए हैं

ऐ मौत इक सिवाए तेरे याद नहीं कुछ
जितने पढ़े थे सारे सबक़ भूल गए हैं

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नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला
आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है

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नश्शा-हा शादाब-ए-रंग-ओ-साज़-हा मस्त-ए-तरब
शीशा-ए-मय सर्व-ए-सब्ज़-ए-जू-ए-बार-ए-नग़्मा है

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उतारा दिल के वरक़ पर तो कितना पछताया
वो इंतिसाब जो पहले बस इक किताब पे था

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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर

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हर सुब्ह निकलना किसी दीवार-ए-तरब से
हर शाम किसी मंज़िल-ए-ग़मनाक पे होना

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उम्मीद-ए-तरब मेरे इस दिल को अभी भी है
हाँ ग़म हैं बहुत से पर वो रब तो अभी भी है

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हर साल की आख़िरी शामों में दो चार वरक़ उड़ जाते हैं
अब और न बिखरे रिश्तों की बोसीदा किताब तो अच्छा हो

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कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ

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बहुत से ग़म समेट कर बनाई एक डाइरी
चुवाव देख रात भर बनाई एक डाइरी

ये हर्फ़ हर्फ़ लफ़्ज़ लफ़्ज़ क़ब्र है वरक़ वरक़
दिल-ए-हज़ीं से इस क़दर बनाई एक डाइरी

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इश्क़ ओ वफ़ा के सारे वरक़ भूल गए हैं
हम पर किसी का कितना था हक़ भूल गए हैं

ऐ मौत इक सिवाए तेरे याद नहीं कुछ
जितने पढ़े थे सारे सबक़ भूल गए हैं

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नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला
आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है

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तरब एक भावनात्मक परमानंद की स्थिति को दर्शाता है, जो अक्सर संगीत या कविता से जुड़ा होता है। यह आत्मा की उस ऊँचाई को पकड़ता है जहाँ आनंद सांसारिकता से परे जाकर दिव्यता को छूता है।

कवि तरब का उपयोग तीव्र आनंद या आध्यात्मिक परमानंद के क्षणों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर संगीत, प्रेम या दिव्य अनुभवों का जश्न मनाने वाली कविताओं में दिखाई देता है।

तरब हमें उस गहन आनंद की याद दिलाता है जो कला उत्पन्न कर सकती है, आत्मा को साधारण से परे उठाते हुए।