Meaning of

तर्ज़

tarz • طرز

शैली; ढंग; तरीका; विधि

style; manner; way; method

طرز; انداز; طریقہ; اسلوب

Arabic

ख़मोशी लफ़्ज़ पर भारी नया तर्ज़-ए-बयाँ अपना
पराए मुल्क में अब ढूँढ़ता हूँ, हम ज़बाँ अपना

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तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से

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इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज़-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे

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अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं
रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे

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कहाँ से चला था निग़ाहों में क्या था कहाँ जा रहा था मुझे सोचने दो
मेरा साज़ क्या था मेरी तर्ज़ क्या थी मैं क्या गा रहा था मुझे सोचने दो

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फिर वही होगी मुहब्बत और वही तर्ज़-ए-ख़ुलूस
अपने ज़ेहनों से तसव्वुर को जुदा तो कीजिए

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ग़ैर-वाजिब है कि ग़ैरों की ज़बाँ है उर्दू
हिन्द के तर्ज़-ओ-तमद्दुन का निशाँ है उर्दू

जिस को ख़ुद अपनी ही औलाद ने पागल है किया
रंज में डूबी हुई ऐसी ही माँ है उर्दू

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मयकशी का मिले लुत्फ़ मुझ को ज़रा
मेरी आँखों से आँखें मिला हम-नवा

मैं ने देखा नहीं है मुकम्मल तुझे
अपने रुख़ से तू पर्दा हटा हम-नवा

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क्या हो गया है दिल को जो यूँँ चीख़ता है ये
आवाज़ रोज़ रोज़ किसे दे रहा है ये

दुनिया शराब ज़हर इसे नाम कुछ भी दे
पर हम तो जानते हैं ग़मों की दवा है ये

जाँ को मेरी क़रार भी जुज़ रंज-ओ-ग़म कहाँ
अब कोई मसअला न रहा मसअला है ये

हम से निगाह फेर के जाना हुज़ूर का
फिर शर्तिया नया कोई तर्ज़-ए-जफ़ा है ये

भागा करे उधर कि जिधर रास्ता नहीं
दिल को कहें भी क्या कि कहाँ मानता है ये

अब और छेड़िए न मेरे दिल को देखिए
पहले ही ज़ार ज़ार लहू रो चुका है ये

इक बार 'मुन्तज़िर' जो लगाया ज़बान से
फिर उम्र भर न जाएगा कैसा नशा है ये

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मुझ को ये नज़र आया के वो एक बला है
कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज -ए- अदा है

वो ग़ैर की आग़ोश में रहने लगा शादाँ
उस को नहीं मालूम के दिल मेरा जला है

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ख़मोशी लफ़्ज़ पर भारी नया तर्ज़-ए-बयाँ अपना
पराए मुल्क में अब ढूँढ़ता हूँ, हम ज़बाँ अपना

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तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से

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मूल रूप से 'तर्ज़' किसी कार्य को करने की विशेष शैली या ढंग को दर्शाता है। कविता में, यह उस विशेष आवाज़ और लय को दर्शाता है जो कवि अपने काम में लाता है, एक हस्ताक्षर जो एक को दूसरे से अलग करता है।

'तर्ज़' का उपयोग कवि अक्सर अपनी अनूठी अभिव्यक्ति को उजागर करने के लिए करते हैं। यह एक काव्यात्मक आवाज़ की विशिष्टता या किसी विशेष शेर की सुंदरता को दर्शा सकता है। यह अधिक सामान्य या साधारण अभिव्यक्तियों के विपरीत होता है।

'तर्ज़' काव्यात्मक व्यक्तित्व की आत्मा है, साहित्य को समृद्ध करने वाली विविध आवाज़ों का प्रमाण है।