Meaning of

नक़ल

naql • نقل

नकल; अनुकरण; प्रतिलिपि

imitation; copy; mimicry

نقل; نقل و حرکت; مشابہت

Arabic

कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले उस इंक़िलाब का जो आज तक उधार सा है — Kaifi Azmi
इंक़लाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं — Ali Sardar Jafri
जब तक कि आदमी को सुकूँ की तलाश है सौ इंक़िलाब आएँगे इक इंक़िलाब क्या — Dharamraj deshraj
सभी की मानने से घर का सब कुछ टूट जाता है मोहब्बत में नकल करने से पेपर छूट जाता है — Amanpreet singh
बहुत बर्बाद हैं लेकिन सदा-ए-इंक़लाब आए वहीं से वो पुकार उठेगा जो ज़र्रा जहाँ होगा — Ali Sardar Jafri
देख रफ़्तार-ए-इंक़लाब 'फ़िराक़' कितनी आहिस्ता और कितनी तेज़ — Firaq Gorakhpuri
नक़्ल किए तो वक़्त में मारे जाओगे सब को अपनी फ़ितरत ज़िंदा रखती है — Rakesh Mahadiuree
इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या — Navneet krishna
"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह" आँखों में वो आँसू नहीं कुछ ख़्वाब सँजोया करता था वतन की आज़ादी के ख़ातिर खूनी आँसू रोया करता था आज़ादी का दीवाना था वो रगों में उबाल ख़ानदानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था अंगारों पर चल कर जिस ने एक नई राह बनाई थी उस मतवाले शे'र ने क़सम आज़ादी की खाई थी चाहे उम्र कम रही हो लेकिन वो एक लंबी कहानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़ इन्कलाब की आग थी आँखों में थी जलती ज्वाला लिबास जिस का त्याग थी हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो भारत माँ की निशानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था जब तक धरती-अम्बर होंगे मिट न सकेगा नाम तुम्हारा भारत का हर बच्चा-बच्चा याद रखेगा काम तुम्हारा समुंदर से भी गहरा था जो ख़ुद में ही एक रवानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था — "Nadeem khan' Kaavish"

मूल रूप से 'नक़ल' का अर्थ है किसी चीज़ की नकल करना या अनुकरण करना। कविता में, यह केवल क्रिया में नहीं बल्कि भावना में भी अनुकरण की भावना को पकड़ता है, जो अनुभवों और भावनाओं को प्रतिबिंबित करने की मानव प्रवृत्ति को दर्शाता है।

'नक़ल' का उपयोग कवि पहचान और प्रामाणिकता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह मौलिकता और अनुकरण के बीच के तनाव को उजागर कर सकता है, अक्सर उधार ली गई भावनाओं में सुंदरता और दुःख को उजागर करता है।

'नक़ल' में अनुकरण के नृत्य में, उधार ली गई और वास्तव में महसूस की गई चीज़ों के बीच नाजुक संतुलन प्रकट होता है।