Meaning of

नख़रा

nakhra • نخرا

अदा; नखरे; चंचलता

affectation; coquettishness; playful demeanor

ادا; نخرے; چنچلتا

Persian

तू नखरे कर बहाने तो बनाता है
न जाने दिल तुझे क्यूँँ झेल जाता है

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तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या
हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे

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कुछ भी कैसे कह देता मैं यार उसे
के पहले था ही नहीं मुझ सेे प्यार उसे

कितने नखरे , कितनी शर्तें , मत पूछो
फिर भी हम ने कर ही लिया तैयार उसे

हर लड़के की ख़्वाहिश बस इतनी सी के
वो साड़ी में दिख जाए इक बार उसे

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अभी तक मैं अगर उस के दिल से उतरा नहीं
फिर मेरे लिए तो इस सेे ज़्यादा कुछ बुरा नहीं

एक जैसे सात चेहरे तो मुमकिन है लेकिन
मिरे ख़याल से तुम जैसा कोई दूसरा नहीं

वो रूठके अगर चाहती है ,, मैं मनाऊं उसे
तो फिर ये प्यार है उस का ,, नख़रा नहीं

महोब्बत करना चाहते हो करो शौक़ से करो
मियाँ मैं कहता हूँ इस
में कुछ भी बुरा नहीं

मिरे दोस्त ये किस की तस्वीर उठा लाए हो
ये सूट तो उसी का है, मगर चेहरा नहीं

मैं इश्क़ के मोहल्ले में गया था तन्हाई बहुत थी
ये तो अच्छा हुआ मैं ज़्यादा दिन ठहरा नहीं

"करन" तुम मोहब्बत में पूरे पागल हो जाओगे
ये सारी दुनिया का शिकवा है सिर्फ़ मेरा नहीं

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न सरकारी हो बन्दा तो कोई लड़की नहीं देता
बचीं थी नौकरी जो भी वो सारी खा गऐ नेता

पता होता के अच्छे दिन मिलेंगे इस तरीके से
बिना नखरे दिखाए मैं तो कब का ब्याह कर लेता

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हम को तो आवाज़ उठा कर कहना भी नाजाइज़ है
आप बड़े घर के बच्चे हैं आप का नख़रा जाइज़ है

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उस के लहज़े में कलाकारी नहीं थी
नखरे थे उस के अदाकारी नहीं थी

अरक़म उस का बस तख़ल्लुस ही वफ़ा था
पर बाकी उस में वफादारी नहीं थी

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वो रूठके अगर चाहती है मैं मनाऊं उसे
तो फिर ये प्यार है उस का नख़रा नहीं

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बहुत मेकअप लगाती है, हमें नखरे दिखाती है
कभी नज़रें चुराती है कभी हम को सताती है

नज़र उस की करे घाइल लबों का काम है मरहम
मुहब्बत दर्द देती है मगर जीना सिखाती है

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छोड़ चला जाता है नाज़ उठाने वाला
सो ज़्यादा नखरे भी ठीक नहीं होते हैं

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तू नखरे कर बहाने तो बनाता है
न जाने दिल तुझे क्यूँँ झेल जाता है

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तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या
हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे

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नखरा उस चंचलता और कभी-कभी अतिरंजित व्यवहार को दर्शाता है जो अक्सर आकर्षण या छेड़छाड़ के लिए उपयोग किया जाता है। कविता में, यह शब्द छेड़खानी और आकर्षण के नाजुक नृत्य की छवियों को उभारता है, जहाँ हर इशारे का एक गहरा अर्थ होता है।

कवि अक्सर 'नखरा' का उपयोग प्रिय की चंचल और मायावी प्रकृति का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह आकर्षण और उदासीनता के बीच के नाजुक संतुलन, आँखों और इशारों के नृत्य, और प्रेम की अनकही भाषा को दर्शा सकता है।

नखरा मानवीय संवाद में सूक्ष्मता की कला को समेटे हुए है, जहाँ हर इशारा अपने आप में एक कविता है।