Meaning of

निस्बत

nisbat • نسبت

संबंध; जुड़ाव; निकटता

relation; connection; affinity

تعلق; ربط; قربت

Arabic

निस्बत-ए-आल-ए-नबी दिल में बसाए रखिए
अपने किरदार में सौ चाँद लगाए रखिए

कोई ख़ाली नहीं जाता कभी इस दर से 'समीर'
बज़्म-ए-शब्बीर को ता-उम्र सजाए रखिए

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कहाँ पे मुस्कुराना है कहाँ पे अश्क लाने हैं
हमारे हाथ से ये भी सहूलत जा रही है क्या

ये ख़ुशियाँ कर रही हैं घर मेरे दिल में मिरे अंदर
उदासी से मुहब्बत और निसबत जा रही है क्या

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हर एक लफ़्ज़ में जादू है तेरी निस्बत से
यही वजह है तुझे चाहते हैं शिद्दत से

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सभी निस्बतें सभी क़ुर्बतें ये धरी की सारी धरी रहीं
तू नहीं था जब तो यहाँ कोई न क़रार दिल को दिला सका

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मेरे तो ज़्हन-ओ-दिल को बस यही ग़म खा रहा है
कोई मुझ से भी ज़्यादा पास तेरे आ रहा है

कुछ इस दरजा तुझे नज़दीक से जाना है मैं ने
कि अब "जस्सर", तेरी निस्बत से दिल उकता रहा है

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दिया बुझाते हुए फूकँ से उसे देखा
बनी नहीं कभी फिर मेरी रौशनी के साथ

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बाहम किए इन्हें जो यही ढाल बन गए
आई समझ में टुकड़ों की क़ुव्वत शिकस्ता दिल

ये और बात उस ने किया क़त्ल अहद का
ये और बात ज़िंदा थी निस्बत शिकस्ता दिल

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जो मर जाएँ उसे फिर से जगाने से भी क्या होगा
है निस्बत रूह का तन को जलाने से भी क्या होगा

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देखा है इश्क़ में निस्बत थी जिन्हें रूह से ही
बस वही लोग मिले हुस्न की ठोकर में पड़े

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क्या अब यही है सच कि मुहब्बत नहीं रही
मतलब यही के तुम को भी हसरत नहीं रही

कल रात तुम ने हम को निकाला जो बज़्म से
यारों में बात क्या रहे इज़्ज़त नहीं रही

जिस जिस भी कूचे में गए खाए हैं ज़ख़्म ही
अब और दिल लगाने की हसरत नहीं रही

तन्हाई भी है दर्द भी है तेरा ग़म भी है
अब मेरे कमरे में कोई ख़ल्वत नहीं रही

अब तो सितम ये है के सितमगर ने कह दिया
अब और सितम को तेरी ज़रूरत नहीं रही

हम जिस के पहलू से चले आए हैं दश्त में
वो दर नहीं रहा कि वो निस्बत नहीं रही

बाज़ार-ए-इश्क़ में भी पुकारे गए मगर
वो दिन नहीं रहे के वो क़ीमत नहीं रही

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निस्बत-ए-आल-ए-नबी दिल में बसाए रखिए
अपने किरदार में सौ चाँद लगाए रखिए

कोई ख़ाली नहीं जाता कभी इस दर से 'समीर'
बज़्म-ए-शब्बीर को ता-उम्र सजाए रखिए

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कहाँ पे मुस्कुराना है कहाँ पे अश्क लाने हैं
हमारे हाथ से ये भी सहूलत जा रही है क्या

ये ख़ुशियाँ कर रही हैं घर मेरे दिल में मिरे अंदर
उदासी से मुहब्बत और निसबत जा रही है क्या

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अपने मूल अर्थ में, 'निस्बत' एक बंधन या संबंध को दर्शाता है, जो अक्सर पारिवारिक या आध्यात्मिक होता है। कविता ने इस शब्द को आत्माओं, विचारों और क्षणों को जोड़ने वाले अदृश्य धागों की खोज के लिए अपनाया है, इसे नियति और गहन निकटता की भावना से भर दिया है।

कवि अक्सर 'निस्बत' का उपयोग प्रेमियों के बीच अदृश्य बंधनों, साधक और दिव्य के बीच आध्यात्मिक संबंध, या दोस्तों के बीच अनकहे समझ को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अधिक ठोस संबंधों के विपरीत है, सच्चे बंधनों की अलौकिक प्रकृति को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'निस्बत' भाग्य की एक फुसफुसाहट बन जाती है, हमारे जीवन को आकार देने वाली अदृश्य शक्तियों की एक कोमल याद दिलाती है।