कहाँ पे मुस्कुराना है कहाँ पे अश्क लाने हैंहमारे हाथ से ये भी सहूलत जा रही है क्याये ख़ुशियाँ कर रही हैं घर मेरे दिल में मिरे अंदरउदासी से मुहब्बत और निसबत जा रही है क्या— Abdulla Asif