Meaning of

नौहा

nauha • نوحہ

विलाप; शोकगीत

lament; elegy

ماتم; مرثیہ

Arabic

होने को इस सफ़र में बहुत राएगाँ हुए
लेकिन हमें शिकस्त का नौहा न जानिए

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ख़ुदा जाने के क्या आया गुमाँ में
चला आया हूँ मैं कू-ए-बुताँ में

चमन में फूल यूँँ नौहा कुनाँ है
कोई ले ले मुझे अपनी अमाँ में

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देखा जो चाँद माह-ए-मुहर्रम का अर्श पर
आँखों ने ज़ेब-ए-तन किया अश्कों का पैरहन

धड़कन से दिल की आई सदा या हुसैन की
नौहा-कुनाँ है नौहा-सरा है हर अंजुमन

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तमाम रात शजर बैठ कर गुलिस्ताँ में
ग़ज़ल में गा के सुनाया गया तुम्हारा हिज्र

गुलों ने नौहा किया भँवरे अश्क़बार हुए
लबों पे जब कभी लाया गया तुम्हारा हिज्र

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होने को इस सफ़र में बहुत राएगाँ हुए
लेकिन हमें शिकस्त का नौहा न जानिए

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ख़ुदा जाने के क्या आया गुमाँ में
चला आया हूँ मैं कू-ए-बुताँ में

चमन में फूल यूँँ नौहा कुनाँ है
कोई ले ले मुझे अपनी अमाँ में

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नौहा गहरे दुःख और शोक का भार वहन करता है। अपने मूल अर्थ में, यह एक विलाप है, एक ऐसा दुःखभरा क्रंदन जो आत्मा में गूंजता है। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि मानव पीड़ा की गहराइयों को खोजा जा सके, अक्सर इसे हानि और लालसा के विषयों के साथ जोड़ा जाता है।

कवि नौहा का उपयोग गहरे शोक की भावना को जगाने के लिए करते हैं। यह अक्सर प्रियजनों की हानि या अधूरी इच्छाओं के विलाप से जुड़ा होता है। यह शब्द एक कविता को गंभीर श्रद्धांजलि या दुःख की प्रकृति पर एक भूतिया प्रतिबिंब में बदल सकता है।

नौहा हृदय के अव्यक्त दुःखों का एक माध्यम है। यह शोक के सार को उसकी शुद्धतम रूप में पकड़ता है।