तमाम रात शजर बैठ कर गुलिस्ताँ मेंग़ज़ल में गा के सुनाया गया तुम्हारा हिज्रगुलों ने नौहा किया भँवरे अश्क़बार हुएलबों पे जब कभी लाया गया तुम्हारा हिज्र— Shajar Abbas