Meaning of

फतह

fatah • فتح

विजय; जीत

victory; triumph

فتح; کامیابی

Arabic

किस को तमन्ना फ़त्ह की किस को ख़याल अब जीत का
मैं हारने वाला हूँ जो उस को बचा लूँ काफ़ी है

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मेरी ख़्वाहिश है कि तुझे फूलों से फतह करूँ
वरना ये काम तो तलवार भी कर सकती है

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ऐ ख़ुदा अब नींद आँखों को अता कर दे
थक गया हूँ 'अफ़्व मेरी सब ख़ता कर दे

मर गया बच्चा तो अंदर उस के शायद इक
ऐ ख़ुदा बूढ़े को फिर से अब फ़ता कर दे

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जंग में पोरस से लड़ते ख़ास मंज़र हो गया
फ़त्ह करनी थी जिसे दुनिया सिकंदर हो गया

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फ़त्ह करना शनावरी होती
माँगना तो गदागरी होती

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कभी तन्हाई-ए-कोह-ओ-दमन इश्क़
कभी सोज़-ओ-सुरूर-ओ-अंजुमन इश्क़

कभी सरमाया-ए-मेहराब-ओ-मिंबर
कभी मौला अली ख़ैबर शिकन इश्क़

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किस को तमन्ना फ़त्ह की किस को ख़याल अब जीत का
मैं हारने वाला हूँ जो उस को बचा लूँ काफ़ी है

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मेरी ख़्वाहिश है कि तुझे फूलों से फतह करूँ
वरना ये काम तो तलवार भी कर सकती है

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'फतह' का मूल अर्थ निर्णायक विजय या जीत है, अक्सर युद्ध या प्रतियोगिता में। कविता में, यह व्यक्तिगत जीत, आध्यात्मिक विजय और आंतरिक संघर्षों पर काबू पाने का प्रतीक बन जाता है, जो दृढ़ता और शक्ति की तस्वीर पेश करता है।

कवि अक्सर 'फतह' का उपयोग विपरीत परिस्थितियों पर विजय के भाव को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम की नफरत पर जीत, सत्य की असत्य पर विजय, या आत्म-विजय का प्रतीक हो सकता है। यह हार या नुकसान को दर्शाने वाले शब्दों के विपरीत है।

'फतह' विजय की भावना को दर्शाता है, बाहरी और आंतरिक दोनों, जो मानव की जीत की खोज के साथ गूंजता है।