Meaning of

मक़ाम

maqaam • مقام

स्थान; जगह; स्थिति

station; place; status

مقام; جگہ; حیثیت

Arabic

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया — Sahir Ludhianvi
मक़ाम 'फ़ैज़' कोई राह में जचा ही नहीं जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले — Faiz Ahmad Faiz
जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब के उसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा — Aabid Adeeb
ख़ौफ़ आता है अपने साए से हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं — Siraj Faisal Khan
उसी मक़ाम पे कल मुझ को देख कर तन्हा बहुत उदास हुए फूल बेचने वाले — Jamal Ehsani
लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे महसूस हो रही है ख़ुद अपनी कमी मुझे — Ali Ahmad Jalili
ये किस मक़ाम पे लाई है ज़िंदगी हम को हँसी लबों पे है सीने में ग़म का दफ़्तर है — Hafeez Banarasi
चमन में रखते हैं काँटे भी इक मक़ाम ऐ दोस्त फ़क़त गुलों से ही गुलशन की आबरू तो नहीं — Ummeed Fazli

मूल रूप से, 'मक़ाम' एक भौतिक स्थान या स्थिति को संदर्भित करता है। कविता में, यह अक्सर एक आध्यात्मिक या भावनात्मक स्थिति, उपलब्धि या मान्यता के स्तर का प्रतीक है, जो आंतरिक और बाहरी दोनों यात्राओं को दर्शाता है।

कवि 'मक़ाम' का उपयोग पहचान और आकांक्षा के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह व्यक्तिगत विकास की खोज या आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जो अक्सर सांसारिक खोजों के विपरीत होता है।

कविता में, 'मक़ाम' आत्म-खोज की यात्रा का प्रतिबिंब बन जाता है, आत्मा की अर्थ की खोज का प्रमाण।