Meaning of

मज़ीद

mazid • مزید

अधिक; आगे

more; further

زیادہ; مزید

Arabic

मज़ीद और न बढ़ जाए बे-क़रारी तेरी
इसीलिए तो मैं इज़हार-ए-इश्क़ चाहता हूँ

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अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता

पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता

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दिल जिस का मोहब्बत में गिरफ़्तार रहा है
वो मेरी मदद के लिए तैयार रहा है

आग़ाज़-ए-मोहब्बत का फ़साना भी था दिलचस्प
बर्बादी का क़िस्सा भी मज़ेदार रहा है

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नसीब लिखने वालें ने क्या कमाल लिखा है
ज़मीर पे मेरे धब्बा उसे रुमाल लिखा है

मुरीद हूँ मैं शिक्षा का मज़ीद ज्ञान नहीं है
जवाब मुश्किल हो ऐसा उसे सवाल लिखा है

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एक लम्हा भी तेरी दीद नहीं
तू रहा मेरा पर मज़ीद नहीं

तेरे जाने का ग़म जो है सो है
तेरे आने की जो उमीद नहीं

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अदीब दुनिया समझ रही है तो क्यूँँ न ख़ुद को वहीद कर लूँ
तराश कर हर हुनर को अपने मज़ीद मुर्शिद मुरीद कर लूँ

रदीफ़ बाँधूँ ग़ज़ल में ऐसा हर इक मआ'नी फ़रीद कर लूँ
जरीद लूँ क़ाफ़िए के अश'आर मैं सभी अब शदीद कर लूँ

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यूँँ ही हमारा सिलसिला चलता रहे मजीद
यूँँ ही हमारे दरमियाँ दूरी बनी रहे

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मज़ीद इतना पढ़ा मुझ को तब ऐसी तर्जुमानी है
मुझी से इश्क़ है उस को मुझी से बद-गुमानी है

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मज़ीद और न बढ़ जाए बे-क़रारी तेरी
इसीलिए तो मैं इज़हार-ए-इश्क़ चाहता हूँ

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अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता

पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता

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मूल रूप में 'मज़ीद' का अर्थ होता है कुछ और जोड़ना या जारी रखना। कविता में, यह अक्सर वर्तमान से परे कुछ पाने की लालसा को दर्शाता है, अनंत की चाह को प्रकट करता है।

'मज़ीद' का प्रयोग कवि अधूरी इच्छाओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर प्रेम, महत्वाकांक्षा और सपनों की खोज से संबंधित शेरों में आता है।

'मज़ीद' मानव लालसा का सार पकड़ता है, हमेशा उस तक पहुँचने की कोशिश करता है जो परे है।