Meaning of

मर्ज़

marz • مرض

बीमारी; रोग; रूपक में, गहरी भावनात्मक या आध्यात्मिक स्थिति

illness; ailment; metaphorically, a deep emotional or spiritual condition

بیماری; عارضہ; استعارہ میں، گہری جذباتی یا روحانی حالت

Arabic

कहा था क्या और क्या बने हो
अजब सा इक मसअला बने हो

हमारी मर्ज़ी कहाँ थी शामिल
तुम अपने मन से ख़ुदा बने हो

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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन
तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है

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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ
वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है

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ये आईने में जो मुस्का रहा है
मेरे होंठों का दुख दोहरा रहा है

मेरी मर्ज़ी मैं उस पे जो लुटाऊँ
तुम्हारी जेब से क्या जा रहा है

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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे

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अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

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हमारी मर्ज़ी से अब क्या बदलने वाला है
तुम्हारे कब्ज़े में वोटिंग मशीन है साहब

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बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए

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सारी तेरी मर्ज़ी है पर, दिल में है एक बात कहूँ
ज़ुल्फ़ें इतनी सुंदर हो तो, बाँधी थोड़ी जाती है

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इस मरज़ से कोई बचा भी है
चारा-गर इश्क़ की दवा भी है

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कहा था क्या और क्या बने हो
अजब सा इक मसअला बने हो

हमारी मर्ज़ी कहाँ थी शामिल
तुम अपने मन से ख़ुदा बने हो

34

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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन
तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है

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'मर्ज़' का मूल अर्थ शारीरिक बीमारी या रोग है। लेकिन कविता में, यह अक्सर शारीरिक से परे जाकर भावनात्मक या आध्यात्मिक पीड़ाओं की गहराई को छूता है। यह पीड़ा, तड़प और मानव स्थिति की छवियों को उभारता है।

कवि 'मर्ज़' का उपयोग गहरी भावनात्मक चोटों या अस्तित्वगत दुविधाओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एकतरफा प्रेम, आंतरिक उथल-पुथल, या अर्थ की खोज का प्रतीक हो सकता है।

'मर्ज़' मानव असुरक्षा और भीतर की मौन लड़ाइयों का सार पकड़ता है। यह एक ऐसा शब्द है जो दिल की छिपी हुई संघर्षों के साथ गूंजता है।