Meaning of

महफ़ूज़

mahfooz • ہری

सुरक्षित; महफूज़; संरक्षित

safe; secure; protected

محفوظ; مامون; محفوظ

Arabic

मुझे मालूम है उस का ठिकाना फिर कहाँ होगा
परिंदा आसमाँ छूने में जब नाकाम हो जाए

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कितना महफ़ूज़ हूँ मैं कोने में
कोई अड़चन नहीं है रोने में

मैं ने उस को बचा लिया वरना
डूब जाता मुझे डुबोने में

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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं
हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं

तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू
तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं

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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी

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जहान भर में न हो मुयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना
नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना

कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों
लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना

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शब बसर करनी है, महफ़ूज़ ठिकाना है कोई
कोई जंगल है यहाँ पास में ? सहरा है कोई ?

47

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अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था
तो फिर तुझे ज़रा पहले बताना चाहिए था

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तुझ को सोचा तो पता हो गया रुसवाई को
मैं ने महफूज़ समझ रखा था तन्हाई को

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इंसान को ही अक़्ल ये आना तो है नहीं
धरती के ही अलावा ठिकाना तो है नहीं

भर लो सिलेंडरों में जहाँ भर की ऑक्सीजन
तुम को मगर दरख़्त लगाना तो है नहीं

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गर कोई मुझ सेे आ कर कहता, यार उदासी है
मैं उस को गले लगाकर कहता, यार उदासी है

होता दरवेश अगर मैं तो फिर सारी दो-पहरी
गलियों में सदा लगाकर कहता, यार उदासी है

43

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मुझे मालूम है उस का ठिकाना फिर कहाँ होगा
परिंदा आसमाँ छूने में जब नाकाम हो जाए

40

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कितना महफ़ूज़ हूँ मैं कोने में
कोई अड़चन नहीं है रोने में

मैं ने उस को बचा लिया वरना
डूब जाता मुझे डुबोने में

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महफूज़ शब्द सुरक्षा और संरक्षण की भावना को जगाता है। कविता में, यह अक्सर एक आश्रय या एक प्रिय स्थिति का प्रतीक होता है, जहाँ व्यक्ति दुनिया की अराजकता से सुरक्षित महसूस करता है।

कवि 'महफूज़' का उपयोग प्रिय के आलिंगन, एक शांतिपूर्ण घर, या शांति के क्षण का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत है जो असुरक्षा या अस्थिरता को दर्शाते हैं।

अपने सार में, 'महफूज़' जीवन के तूफानों के बीच एक आश्रय की लालसा को पकड़ता है।