
इंसान को ही अक़्ल ये आना तो है नहीं
धरती के ही अलावा ठिकाना तो है नहीं
भर लो सिलेंडरों में जहाँ भर की ऑक्सीजन
तुम को मगर दरख़्त लगाना तो है नहीं
— Gagan Bajad 'Aafat'
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