Meaning of

मा'सूम

ma'soom • معصوم

निर्दोष; पवित्र

innocent; pure

معصوم; پاک

Arabic

मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है — Rajesh Reddy
हम सेे जो रूठ गया है वो है बहुत मासूम हम तो औरों को मनाने के लिए निकले है — Jaun Elia
मेरी कोशिश तो यही है कि ये मासूम रहे और दिल है कि समझदार हुआ जाता है — Vikas Sharma Raaz
तुम्हें कुछ भी नहीं मालूम लोगों फ़रिश्तों की तरह मासूम लोगों — Taj Bhopali
तू याद आया तेरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए मोहब्बत में ये मा'सूमी बड़ी मुश्किल से आती है — Firaq Gorakhpuri
मैं ख़ुद भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ कोई मासूम क्यूँ मेरे लिए बदनाम हो जाए — Bashir Badr
जो उन मासूम आँखों ने दिए थे वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ — Firaq Gorakhpuri
ज़माना देखता है बस ज़माने की निग़ाहों से भरी महफ़िल में क्यूँँ मासूम को बदनाम करता है — Rakesh Mahadiuree
किसी मासूम ने लूटा था मुझ को नया दिलबर सयाना चाहता हूँ — Amaan Pathan

अपने मूल अर्थ में, 'मा'सूम' एक ऐसी पवित्रता को दर्शाता है जो दुनिया की कठोरता से अछूती है। यह एक बच्चे की छवि को उभारता है, जो निष्कलंक और सच्चा होता है, जिसकी मासूमियत दुनिया की अच्छाई की संभावना को दर्शाती है। कविता में, यह मासूमियत आशा का प्रतीक बन जाती है और उस पवित्रता की याद दिलाती है जो कभी थी।

कवि अक्सर 'मा'सूम' का उपयोग प्रकृति की अछूती सुंदरता या प्रेम के निष्कलंक सार को उभारने के लिए करते हैं। यह जीवन की कठोर वास्तविकताओं के विपरीत होता है, मासूमियत की नाजुकता और मूल्य को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'मा'सूम' हमारे भीतर और हमारे चारों ओर मौजूद पवित्रता की कोमल याद दिलाता है, हमें इसे संजोने और संरक्षित करने का आग्रह करता है।