Meaning of

मुख़ातब

mukhaatab • مخاطب

संबोधित व्यक्ति; जिसे संबोधित किया गया हो

addressee; one who is addressed

مخاطب; جسے خطاب کیا گیا ہو

Arabic

दास्तानें इश्क़ में जब लोग लेंगे नाम मेरा
बे-वफ़ा कह कर ही तुझ को तो मुख़ातिब वो करेंगे

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तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखें कि तुम से बात करें

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तुम ने किस कैफ़ियत में मुख़ातब किया
कैफ़ देता रहा लफ़्ज़-ए-'तू' देर तक

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ख़ुशरंग नज़र आता है जाज़िब नहीं लगता
माहौल मेरे दिल से मुख़ातिब नहीं लगता

मैं भी नहीं हर शे'र में मौजूद ये सच है
ग़ालिब भी हर इक शे'र में ग़ालिब नहीं लगता

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ऐसी दस्तक दी सावन ने सागर ने दरवाज़े खोले
तू आग़ाज़-ए-दरिया कौन सा झरना तुझ सेे ऊँचा बोले

यक़ीन मानो मेरा इक ऐसी लड़की से मैं हूँ मुख़ातिब
जब भी बात करे वो तो लगता है फूल में ख़ुशबू घोले

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इतने अदब के साथ मुख़ातिब किया मुझे
उर्दू थी वो ज़बान जो दिल में उतर गई

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फिर नया ख़्वाब बुन रही हो ना
राह दुश्वार चुन रही हो ना

मैं यहाँ तुम से ही मुख़ातिब हूँ
मेरी आवाज़ सुन रही हो ना

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इक ज़माने से हर पल मुख़ातिब हूँ मैं
इक ज़माने को देखे ज़माना हुआ

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अभी हम को मुनासिब आप होते से नहीं लगते
ब–चश्म–ए–तर मुख़ातिब हैं प रोते से नहीं लगते

वही दर्या बहुत गहरा वही तैराक हम अच्छे
हुआ है दफ़्न मोती अब कि गोते से नहीं लगते

ये आई रात आँखों को चलो खूँ–खूँ किया जाए
बदन ये सो भी जाए आँख सोते से नहीं लगते

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हर किसी को मैं मुख़ातिब कह के "तुम" करता नहीं हूँ
तुम को जो "तुम" कह दिया समझो बहुत ही ख़ास हो तुम

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दास्तानें इश्क़ में जब लोग लेंगे नाम मेरा
बे-वफ़ा कह कर ही तुझ को तो मुख़ातिब वो करेंगे

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तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखें कि तुम से बात करें

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मुख़ातब एक श्रोता या दर्शक की उपस्थिति को दर्शाता है, एक मौन गवाह जो कथा के विस्तार को देखता है। कविता में, यह अक्सर वक्ता और श्रोता के बीच की घनिष्ठ संबंध को दर्शाता है, समझ और भावना का एक पुल।

कवि अक्सर मुख़ातब का उपयोग अपनी कविताओं में संवाद बनाने के लिए करते हैं, पाठक या प्रियजन को संबोधित करते हैं। यह व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और भावनात्मक आदान-प्रदान के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करता है।

मुख़ातब हमें गहराई से सुनने के लिए आमंत्रित करता है, शब्दों से परे जाने वाली काव्यात्मक बातचीत का हिस्सा बनने के लिए।