
ऐसी दस्तक दी सावन ने सागर ने दरवाज़े खोले
तू आग़ाज़-ए-दरिया कौन सा झरना तुझ से ऊँचा बोले
यक़ीन मानो मेरा इक ऐसी लड़की से मैं हूँ मुख़ातिब
जब भी बात करे वो तो लगता है फूल में ख़ुशबू घोले
— Jagveer Singh
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