Meaning of

मुज़रिम

muzrim • مجرم

अपराधी; दोषी

criminal; offender

مجرم; قصوروار

Arabic

कोई मुजरिम नहीं है इस दफ़ा याँ
ख़ुद अपने आप से नाराज़ हूँ मैं

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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते

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वुफ़ूर-ए-ग़म में भी कैफ़-ओ-नशात का आलम
निज़ाम-ए-दहर में वजह-ए-सुरूर है कोई

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आईने के दोनों तरफ़ मुजरिम खड़ा है और
लोग हैं कि आईने को गुनहगार बताते हैं

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हम खड़े रहते हैं मुजरिम की तरह महफ़िल में
उन का अंदाज़ वकीलों की तरह होता है

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साथ उस का छोड़ता हूँ, हाथ ऐसे काँपते है
जुर्म करने पर कोई मुजरिम के जैसे काँपते है

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ये किस ने जेल में लाया खाना हाए अल्लाह
मुजरिम का भी है कोई दीवाना हाए अल्लाह

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तुम हमारा घर जलाते जा रहे हो कुछ नहीं
हम ने अपना घर बचाया और मुज़रिम हो गए

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इश्क़ करना अगर ज़ुल्म है तो सुनो
हम सेे बढ़ कर यहाँ कोई मुजरिम नहीं

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तू तो अपनी शातिर आँखों का मुजरिम है प्यारे
फिर बिन्त-ए-हव्वा पर क्यूँ इल्ज़ाम लगाया जाए

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कोई मुजरिम नहीं है इस दफ़ा याँ
ख़ुद अपने आप से नाराज़ हूँ मैं

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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते

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मुज़रिम नैतिक और कानूनी उल्लंघन का भार वहन करता है। कविता में, यह अक्सर अपराधबोध के आंतरिक संघर्ष और उसके बाद के सामाजिक निर्णय का प्रतीक होता है। यह एक ऐसी दुनिया को जगाता है जहाँ कार्यों के परिणाम होते हैं, और आत्मा अपनी छायाओं से जूझती है।

कवि मुज़रिम का उपयोग अपराधबोध, मोचन और मानव स्थिति के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह सामाजिक निंदा और क्षमा के लिए संघर्ष को भी दर्शा सकता है।

मुज़रिम मानव त्रुटिपूर्णता और मोचन की खोज के सार को पकड़ता है, जो एक कालातीत काव्यात्मक अन्वेषण है।