Meaning of

मुर्शद

Murshad • مرشد

आध्यात्मिक गुरु; मार्गदर्शक

spiritual guide; mentor

روحانی رہنما; مرشد

Arabic

टूट जाता इम्तिहानों से न होकर मुतमइन
हूँ बुलंदी पे जो मुर्शिद हौसला मिलता रहा

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इस्लाह न कर पाए जो इंसान की मुर्शिद
वो इल्म हक़ीक़त में कोई इल्म नहीं है

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हो रहा उस पे मुर्शद असर संग का
उस के अंदर तकब्बुर है बे-ढंग का

दिल मचलता है मेरा उसे देख कर
जो पहनती है बुर्क़ा हरे रंग का

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किस ने कहा चाहत की भूखी होती है
यार न ये इज़्ज़त की भूखी होती है

मैं हूँ इन के रग रग से वाक़िफ़ मुर्शद
हर लड़की दौलत की भूखी होती है

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किसी मुर्शद से पूछूँगा, मैं उस को ये बताऊँगा
मुहब्बत इक क़यामत है, बता दे और क्या-क्या है

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अदीब दुनिया समझ रही है तो क्यूँँ न ख़ुद को वहीद कर लूँ
तराश कर हर हुनर को अपने मज़ीद मुर्शिद मुरीद कर लूँ

रदीफ़ बाँधूँ ग़ज़ल में ऐसा हर इक मआ'नी फ़रीद कर लूँ
जरीद लूँ क़ाफ़िए के अश'आर मैं सभी अब शदीद कर लूँ

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घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने
जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था

दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए
तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था

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अगर जन्नत मिला करती फ़क़त सज्दों के बदले में
तो फिर इबलीस मुर्शिद सब सेे पहले जन्नती होता

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चूमूँगा पहले पत्तियाँ मुर्शीद गुलाब की
दूँगा गुलाब फिर उसे यौम-ए-गुलाब पर

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तोड़कर मैं गुलाब गुलशन से
उस के गजरे बनाऊँगा मुर्शिद

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टूट जाता इम्तिहानों से न होकर मुतमइन
हूँ बुलंदी पे जो मुर्शिद हौसला मिलता रहा

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इस्लाह न कर पाए जो इंसान की मुर्शिद
वो इल्म हक़ीक़त में कोई इल्म नहीं है

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‘मुर्शद’ शब्द एक बुद्धिमान और करुणामय मार्गदर्शक की छवि प्रस्तुत करता है, जो साधक को आध्यात्मिक खोजों की भूलभुलैया से बाहर निकालता है। कविता में, यह अक्सर ज्ञान और प्रबोधन के अंतिम स्रोत का प्रतीक होता है, अज्ञानता के अंधकार में एक प्रकाशस्तंभ।

कवि अक्सर 'मुर्शद' का आह्वान करते हैं ताकि मार्गदर्शन की लालसा और उन लोगों के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की जा सके जो सत्य के मार्ग को प्रकाशित करते हैं। यह दिशा के बिना खोए हुए यात्री के विपरीत है। यह शब्द उस आंतरिक आवाज का भी प्रतीक हो सकता है जो किसी के विवेक का मार्गदर्शन करती है।

काव्यात्मक क्षेत्र में, 'मुर्शद' ज्ञान की अनंत खोज और मार्गदर्शन में मिलने वाले सांत्वना का प्रतीक है। यह संदेह के साये को दूर करने वाले प्रकाश की याद दिलाता है।