Meaning of

रद़ीफ

radif • ردیف

रदीफ़; दोहराई गई पंक्ति

refrain; repeated phrase

ردیف; دہرائی گئی عبارت

Persian

शा'इरी क्या है रदीफ़ ओ क़ाफ़िया क्या च़ीज़ है
आप ही मुझ को बताएँ मैं अभी बेबहर हूँ

1

Download Image

लिखना जो हुआ ख़ुद को इक दिया लिखूँगा मैं
दिलरुबा को अपने बहती हवा लिखूँगा मैं

बे-चैन हो ख़त पढ़ के उस को नींद ना आए
नाम अपना कोने में सर-फिरा लिखूँगा मैं

इश्क़ की ग़ज़ल मेरी हो गई मुकम्मल तो
ख़ुद रदीफ़ बन तुम को क़ाफ़िया लिखूँगा मैं

9

Download Image

अधूरे ज़ीस्त के मिसरे ग़ज़ल कोई अधूरी सी
क़वाफ़ी से बदलते तुम मेरी फ़ितरत रदीफ़ों सी

8

Download Image

रोज़ ही कवाफ़ी से लड़ती हैं मेरी ग़ज़लें
दूर से तमाशा ये अब रदीफ़ें देखेंगी

8

Download Image

रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र का भी इल्म है लाज़िम
फ़क़त दिल टूट जाने से कोई शाइ'र नहीं बनता

6

Download Image

तुम हो पूरी ग़ज़ल, बिंदी उस
में रदीफ़
और झुमका मुझे क़ाफ़िया सा लगे

3

Download Image

अदीब दुनिया समझ रही है तो क्यूँँ न ख़ुद को वहीद कर लूँ
तराश कर हर हुनर को अपने मज़ीद मुर्शिद मुरीद कर लूँ

रदीफ़ बाँधूँ ग़ज़ल में ऐसा हर इक मआ'नी फ़रीद कर लूँ
जरीद लूँ क़ाफ़िए के अश'आर मैं सभी अब शदीद कर लूँ

3

Download Image

हम रदीफ़ थे सो बस चाहते रहे उस को
क़ाफ़िया नहीं थे जो इश्क़ को बदलते हम

2

Download Image

वक़्त लगता हैं रदीफ़-ओ-क़ाफ़िये में
ये ग़ज़ल यूँँ ही नहीं होती मुक़म्मल

1

Download Image

दिलासा ही दिलाया जा रहा है
अभी भी आज़माया जा रहा है

रदीफ़-ओ-काफ़िया के गुर सिखा कर
हमें शाइ'र बनाया जा रहा है

1

Download Image

शा'इरी क्या है रदीफ़ ओ क़ाफ़िया क्या च़ीज़ है
आप ही मुझ को बताएँ मैं अभी बेबहर हूँ

1

Download Image

लिखना जो हुआ ख़ुद को इक दिया लिखूँगा मैं
दिलरुबा को अपने बहती हवा लिखूँगा मैं

बे-चैन हो ख़त पढ़ के उस को नींद ना आए
नाम अपना कोने में सर-फिरा लिखूँगा मैं

इश्क़ की ग़ज़ल मेरी हो गई मुकम्मल तो
ख़ुद रदीफ़ बन तुम को क़ाफ़िया लिखूँगा मैं

9

Download Image

‘रदीफ़’ कविता की गूंज है, एक दोहराई गई पंक्ति जो छंदों को एक साथ बांधती है। यह निरंतरता और लय का भार वहन करता है, एक सामंजस्यपूर्ण प्रवाह बनाता है।

कवि ‘रदीफ़’ का उपयोग ग़ज़ल में एकता और जोर देने की भावना पैदा करने के लिए करते हैं। यह एक संगीतात्मक लंगर के रूप में कार्य करता है, प्रत्येक पुनरावृत्ति के साथ पाठक को केंद्रीय विषय की ओर खींचता है।

रदीफ़ ग़ज़ल की धड़कन है, एक लयबद्ध स्पंदन जो आत्मा के साथ गूंजता है।