
लिखना जो हुआ ख़ुद को इक दिया लिखूँगा मैं
दिलरुबा को अपने बहती हवा लिखूँगा मैं
बे-चैन हो ख़त पढ़ के उस को नींद ना आए
नाम अपना कोने में सर-फिरा लिखूँगा मैं
इश्क़ की ग़ज़ल मेरी हो गई मुकम्मल तो
ख़ुद रदीफ़ बन तुम को क़ाफ़िया लिखूँगा मैं
— Vedic Dwivedi
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