Meaning of

रदीफ़

radeef • ردیف

रदीफ़; कविता में दोहराई जाने वाली पंक्ति

refrain; repeated phrase in poetry

ردیف; شاعری میں دہرائی جانے والی عبارت

Persian

रोज़ ही कवाफ़ी से लड़ती हैं मेरी ग़ज़लें दूर से तमाशा ये अब रदीफ़ें देखेंगी — Priya omar
हम रदीफ़ थे सो बस चाहते रहे उस को क़ाफ़िया नहीं थे जो इश्क़ को बदलते हम — Kaviraj " Madhukar"
अधूरे ज़ीस्त के मिसरे ग़ज़ल कोई अधूरी सी क़वाफ़ी से बदलते तुम मेरी फ़ितरत रदीफ़ों सी — Priya omar
रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र का भी इल्म है लाज़िम फ़क़त दिल टूट जाने से कोई शाइ'र नहीं बनता — Avtar Singh Jasser
वक़्त लगता हैं रदीफ़-ओ-क़ाफ़िये में ये ग़ज़ल यूँँ ही नहीं होती मुक़म्मल — Salma Malik
शा'इरी क्या है रदीफ़ ओ क़ाफ़िया क्या च़ीज़ है आप ही मुझ को बताएँ मैं अभी बेबहर हूँ — Avtar Singh Jasser

रदीफ़ एक काव्य उपकरण है जो कविता में लय और सामंजस्य लाता है। यह वह दोहराई जाने वाली पंक्ति है जो ग़ज़ल में गूंजती रहती है, निरंतरता और एकता की भावना पैदा करती है। कविता में, यह एक संगीतात्मक लंगर के रूप में कार्य करता है, अपनी आवर्ती उपस्थिति के साथ छंदों को जोड़ता है।

कवि रदीफ़ का उपयोग लय और संगीतता की भावना पैदा करने के लिए करते हैं। यह अक्सर कविता के केंद्रीय विषय को उजागर करता है। दोहराव भावनाओं को जगाने और संदेश को मजबूत करने में सक्षम होता है। रदीफ़ ग़ज़लों की पहचान है, जो उन्हें अन्य काव्य रूपों से अलग करती है।

रदीफ़ ग़ज़ल की आत्मा है, जो छंदों को एक सामंजस्यपूर्ण संपूर्ण में बुनती है।