Meaning of

रस

ras • رس

रस; सार; भावना

juice; essence; sentiment

رس; جوہر; جذبات

Sanskrit

हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी — Azm Shakri
कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं — Umair Najmi
वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है ये अगर रस्मों रिवाजों से बग़ावत है तो है — Deepti Mishra
मैं रस्मन कह रहा हूँ ''फिर मिलेंगे'' ये मत समझो कि वा'दा कर रहा हूँ — Zubair Ali Tabish

मूल रूप में 'रस' का अर्थ है फलों या पौधों से निकाला गया सार या रस। कविता में, यह एक छंद के माध्यम से बहने वाली भावनात्मक सार या भावना को दर्शाता है, जो दिल की गहरी भावनाओं को पकड़ता है।

कवि अक्सर 'रस' का उपयोग भावनाओं की समृद्धि को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम की मिठास या दुःख की कड़वाहट को दर्शा सकता है। यह वह अदृश्य धागा है जो शब्दों को पाठक की आत्मा से जोड़ता है।

रस कविता का जीवनधारा है, जो छंदों को भावनाओं की जीवंतता से भर देता है।