Meaning of

रसूल

rasool • رسول

दूत; पैग़म्बर

messenger; prophet

پیغامبر; نبی

Arabic

शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है
रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है

सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को
वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

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कोई गाली अगर देगा तो उत्तर देंगे फूलों से
जी हम ने सीखा है ये सब भी अपने ही रसूलों से

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बातें जो कर रहे हैं अल्लाह रसूल की
रखते तो होंगे ख़्वाहिश जन्नत के फूल की

बाग़ ए इरम से फेंका सीधे ज़मीन पर
कितनी बड़ी सज़ा है छोटी सी भूल की

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उम्मत ने ज़ुल्म ढाया ये आल-ए-रसूल पर
साया तलक ना छोड़ा मज़ार-ए-बतूल पर

चारों तरफ़ है फैली मदीने में रौशनी
पर तीरगी है आज भी क़ब्र-ए-बतूल पर

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हुज़ूर-ए-पाक रसूल-ए- ख़ुदा के सदक़े में
हबीब-ए-किब्रिया ख़ैरुल वरा के सदक़े में

दुआएँ उन की यक़ीनन क़ुबूल होंगी रज़ा
जो माँगते हैं दुआ मुस्तफ़ा के सदक़े में

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चश्म-ए-बद-बीन से न देख हमें
यार उल्फ़त-शिआर हैं हम लोग

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कि जिन के घर में अताअत रसूल होती है
हमेशा उन की इबादत क़ुबूल होती है

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सोचता हूँ क्या मिरा बनता ख़ुदा के सामने
गर न होता या रसूल अल्लाह सहारा आप का

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जो बेटियों को बोझ समझते हैं सोचिए
क्योंकर उन्हें ग़ुलाम-ए-रसूल-ए-ख़ुदा कहें

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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है
रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है

सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को
वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है
रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है

सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को
वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

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कोई गाली अगर देगा तो उत्तर देंगे फूलों से
जी हम ने सीखा है ये सब भी अपने ही रसूलों से

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अपने मूल अर्थ में, 'रसूल' एक दूत को संदर्भित करता है, अक्सर दिव्य अर्थों के साथ। कविता में, यह शब्द आध्यात्मिक मार्गदर्शन और दिव्य संबंध का भार वहन करता है, श्रद्धा और पवित्रता की भावना को जागृत करता है।

कवि अक्सर 'रसूल' का उपयोग दिव्य ज्ञान और मार्गदर्शन के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह मानवता और दिव्यता के बीच संबंधों की खोज करने वाले छंदों में, या आध्यात्मिक यात्राओं पर विचारों में प्रकट हो सकता है।

'रसूल' शब्द सांसारिक और दिव्य के बीच एक पुल का प्रतीक है, आध्यात्मिक सत्य की अनवरत खोज का प्रमाण है।