शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब हैरौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब हैसूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात कोवो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है— SALIM RAZA REWA