Meaning of

रुख़

rukh • رخ

चेहरा; दिशा; पहलू

face; direction; aspect

چہرہ; سمت; پہلو

Persian

वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? — Zubair Ali Tabish
अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है — Qamar Moradabadi
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं — Nida Fazli
क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ — nakul kumar
पूछा जो उन सेे चाँद निकलता है किस तरह ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँँ — Arzoo Lakhnavi
ये किस के द्वार पे खड़ा ज़िंदा दरख़्त है इन पत्थरों के शहर में इंसान कौन है — nakul kumar

'रुख़' मूल रूप से चेहरे या दिशा को संदर्भित करता है, जो बाहरी रूप या अभिविन्यास का प्रतीक है। कविता में, यह प्रिय के चेहरे, जीवन की दिशा, या भाग्य के बदलते पहलुओं के लिए एक रूपक बन जाता है।

कवि अक्सर 'रुख़' का उपयोग प्रिय के चेहरे का वर्णन करने के लिए करते हैं, इसकी सुंदरता और रहस्य को पकड़ते हैं। यह जीवन की यात्रा में बदलावों का भी संकेत देता है, अस्तित्व की हमेशा बदलती प्रकृति को दर्शाता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'रुख़' प्रिय की मोहकता और भाग्य के अप्रत्याशित रास्तों दोनों को समाहित करता है।