Meaning of

रुख़सार

rukhsaar • مٹےگی

गाल; चेहरा

cheek; face

رخسار; چہرہ

Persian

क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ — nakul kumar
सो देख कर तेरे रुख़्सार-ओ-लब यक़ीं आया कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी — Ahmad Faraz
रुख़्सार का दे शर्त नहीं बोसा-ए-लब से जो जी में तिरे आए सो दे यार मगर दे — Maatam Fazl Mohammad
ग़ज़ल पूरी न हो चाहे, मग़र इतनी सी ख़्वाहिश है मुझे इक शे'र कहना है तेरे रुख़्सार की ख़ातिर — Siddharth Saaz
अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है — Qamar Moradabadi
उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आँसू तौबा मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा — Sahir Ludhianvi
रुख़्सार पर है रंग-ए-हया का फ़रोग़ आज बोसे का नाम मैं ने लिया वो निखर गए — Hakim Mohammad Ajmal Khan Shaida
दर्द की कैफ़ियत कैसे कह दें? बूझो रुख़्सार पे झिलमिल क्या है — Saurabh Mehta 'Alfaaz'
वो हसीं चेहरा वो रुख़्सार वो दिलकश आँखें वो ख़द-ओ-ख़ाल भुलाने में ज़माने लगे हैं — Dharmesh bashar

रुख़सार शब्द गाल की कोमलता और सुंदरता को दर्शाता है। कविता में, यह अपने शाब्दिक अर्थ से आगे बढ़कर प्रिय के चेहरे की मोहकता और आकर्षण का प्रतीक बन जाता है, जिसमें युवा सौंदर्य और भावनाओं की लाली समाहित होती है।

कवि अक्सर 'रुख़सार' का उपयोग प्रिय की सुंदरता का वर्णन करने के लिए करते हैं, जिसमें कोमल वक्र और भावनाओं की गर्माहट पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इसे दुनिया की कठोरता के विपरीत, प्रिय के चेहरे को शांति और प्रेम के आश्रय के रूप में दर्शाया जाता है।

रुख़सार प्रिय के चेहरे की कोमल सुंदरता को दर्शाता है, जो प्रेम के कोमल स्पर्श का काव्यात्मक प्रतीक है।