Meaning of

संग-ए-मरमर

sang-e-marmar • سنگ مرمر

संगमरमर

marble

سنگ مرمر

Persian

अपनी परछाई से ही डर जाएँगे इक दिन
लोग मुसाफिऱ हैं अपने घर जाएँगे इक दिन

ये महलों की ज़ीनत ये संग-ए-मरमर क्या हैं
ये भी पानी बन के समुंदर जाएँगे इक दिन

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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से
ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है

ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो
मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है

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अपनी मिट्टी ही पे चलने का सलीक़ा सीखो
संग-ए-मरमर पे चलोगे तो फिसल जाओगे

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तुम जो हँसती हो तो मस्ताना कँवल लगती हो
'मीर' का शे'र हो 'ग़ालिब' की ग़ज़ल लगती हो

संग-ए-मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन
साँस लेता हुआ इक ताजमहल लगती हो

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संग-ए-मरमर की मूरत नहीं आदमी
इस क़दर ख़ूब-सूरत नहीं आदमी

चंद क़िस्सों की दरकार है बस इसे
आदमी की ज़रूरत नहीं आदमी

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गरीबों की मुहब्बत का नहीं है मोल कोई अब
वगर्ना देखते सारे जहाँ में संगमरमर तुम

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ताज को कब तक निहारूँ बैठ तन्हा
या'नी मुझ को भी बनाओ संगमरमर

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संगेमरमर की तुम कोई मूरत नहीं
इतनी ज़्यादा भी तुम ख़ूब-सूरत नहीं

तुझ को मेरी ज़रूरत नहीं है अगर
मुझ को भी तेरी कोई ज़रूरत नहीं

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अपनी परछाई से ही डर जाएँगे इक दिन
लोग मुसाफिऱ हैं अपने घर जाएँगे इक दिन

ये महलों की ज़ीनत ये संग-ए-मरमर क्या हैं
ये भी पानी बन के समुंदर जाएँगे इक दिन

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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से
ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है

ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो
मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है

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संग-ए-मरमर संगमरमर की शाश्वत सुंदरता और ठंडी भव्यता को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर शुद्धता, स्थायित्व, और प्रकृति की कला की मौन शक्ति का प्रतीक होता है।

कवि संग-ए-मरमर का उपयोग शाश्वत और क्षणभंगुर के बीच के विरोधाभास को दर्शाने के लिए करते हैं, पत्थर की ठंडक के खिलाफ मानवीय भावना की गर्मी।

संग-ए-मरमर प्रकृति की शाश्वत कला का प्रमाण है।