Meaning of

फ़कीरी

faqeeri • فقیری

संन्यास; भिक्षावृत्ति

asceticism; mendicancy

فقر; درویشی

Arabic

अपने हाकिम की फ़कीरी पे तरस आता है जो ग़रीबों से पसीने की कमाई माँगे — Rahat Indori
मैं माँ की ही बदौलत आज क़ाबिल हो सकी इतनी नहीं तो फ़कीरी का कहा सुन कर वो मेरी रोक सकती थी पढ़ाई — Bhoomi Srivastava
फ़क़ीरी को ख़ुदाई हुस्न देना है हमें 'लाजो इसी फ़ाके का हम को यार अब रोज़ा बनाना है — Aarush Sarkaar
क्या फ़क़ीरी बस एक धोखा है ये भी रूहों को घर नहीं देती — Ajeetendra Aazi Tamaam
तुम्हें कुछ दे नहीं सकता मगर फिर भी फ़कीरी में निकलती है दुआ मुझ सेे — Prashant Sitapuri
फ़क़ीरी से किस्मत न बदले अगर कुदालों से अपना तू कासा बदल — Aarush Sarkaar
मस्त हूँ अपनी फ़क़ीरी में मियाँ मैं शर्तों पर सुलतान बनकर क्या करूँँगा — Kumar Aryan
बसर होगी भला दुनिया में कैसे बदन से ही फ़क़ीरी जा रही है — Lokesh Singh

'फ़कीरी' एक सरलता और त्याग के जीवन का सुझाव देती है, जहाँ सांसारिक संपत्ति का कोई मूल्य नहीं होता। कविता में, यह भौतिक इच्छाओं से आत्मा की मुक्ति को दर्शाती है, आध्यात्मिक समृद्धि और विनम्रता को अपनाती है।

कवि 'फ़कीरी' का उपयोग अलगाव और आंतरिक धन के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह भौतिक धन की क्षणिक प्रकृति को आत्मा की स्थायी समृद्धि के साथ विपरीत करता है। फ़कीर को अक्सर बुद्धिमान और संतुष्ट के रूप में चित्रित किया जाता है।

कविता में 'फ़कीरी' आत्मा की सच्ची समृद्धि की याद दिलाती है, जो संपत्ति में नहीं बल्कि शांति और ज्ञान में पाई जाती है।