Meaning of

अहद

ahd • عہد

वादा; संधि

promise; covenant

عہد; معاہدہ

Arabic

दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था
इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही

उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर
मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

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मेरी अक्ल-ओ-होश की सब हालतें
तुम ने साँचे में जुनूँ के ढाल दी

कर लिया था मैं ने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
तुम ने फिर बाँहें गले में डाल दी

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ये सोच कर कोई अहद-ए-वफ़ा करो हम सेे
हम एक वादे पे 'उम्रें गुज़ार देते हैं

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'ताहिर' उन बे-बस लम्हों का अहद निभाना होगा
उस ने कहा था ख़त मत लिखना ग़ज़लें लिखते रहना

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तलाश हम को किसी भी बदन की है ही नहीं
हवस की भूख हमारे ज़ेहन की है ही नहीं

किसी से बिछड़े तो कोई फ़ना नहीं होता
क़ज़ा की बात तो अब के ज़मन की है ही नहीं

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इस अहद में हज़ार के नोटों की क़द्र है
गाँधी भी ख़ुश नहीं थे चवन्नी पे बैठ कर

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जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करें
बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए

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वफ़ा का अहद था दिल को सँभालने के लिए
वो हँस पड़े मुझे मुश्किल में डालने के लिए

27

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अहद-ए-रफ़ाक़त ठीक है लेकिन मुझ को ऐसा लगता है
तुम तो मेरे साथ रहोगी मैं तन्हा रह जाऊँगा

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दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था
इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही

उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर
मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

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अहद एक गंभीर वादा या बाध्यकारी समझौते का संकेत देता है। कविता में यह वचनों की पवित्रता और प्रतिबद्धताओं के भार को व्यक्त करता है, अक्सर अपने शब्द को निभाने की नैतिक और भावनात्मक गहराई को दर्शाता है।

कवि अहद का उपयोग वफादारी, निष्ठा और वादों की पवित्र प्रकृति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। इसे अक्सर विश्वासघात के विपरीत रखा जाता है, टूटे हुए वचनों के दर्द को उजागर करते हुए।

अहद वादों की पवित्र डोर है, जो दिलों को सत्य और विश्वास के भार से बांधती है।