दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द थाइस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रहीउस ने तो यूँ ही पेड़ बनाया था रेत परमिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही— Vipul Kumar