Meaning of

अख़्त्यार

akhtiyaar • اختیار

अधिकार; चुनाव; नियंत्रण

authority; choice; control

اختیار; انتخاب; کنٹرول

Arabic

दर्द ग़म परेशानी कुछ नहीं मुहब्बत में
काश वक़्त पर मेरा इख़्तियार कर लेतीं

आज ये मिरी वहशत भी मिरी ब-दौलत है
मौत पर ज़रा हम को याद यार कर लेतीं

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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं

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अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें
रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम

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इस का अपनी ही रवानी पर नहीं है इख़्तियार
ज़िंदगी शिव की जटाओं में है गंगा की तरह

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उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है,
जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे

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मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ
ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ

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ये प्यार, इश्क़, कौन कहता है के है ख़ता कोई
ऐ दोस्त! थोड़ा तो मगर अख़्त्यार होना चाहिए

मर जाना सिर्फ़ हुस्न पर तो अक़्लमंदी है नहीं
महबूब कोई हो मगर हुश्यार होना चाहिए

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सेठ बस साँसें हैं उस बेवा की गिरवी रखने को
यूँँ भी क्या बचता है मंगलसूत्र को दे देने से

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कोई ख़ुशियाँ कोई ख़्वाहिश तो उल्फ़त माँगता कोई
किसी पीपल के ज़रिये से भी मन्नत माँगता कोई

अगर आदम को ख़ुद पे इख़्तियार आ जाता तो मौला
न दुनिया में कोई आता न जन्नत माँगता कोई

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गली के मोड़ पे बच्चों के एक जमघट में
किसी ने दर्द-भरे लय में माहिया गाया

मुझे किसी से मोहब्बत नहीं मगर ऐ दिल
ये क्या हुआ कि तू बे-इख़्तियार भर आया

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दर्द ग़म परेशानी कुछ नहीं मुहब्बत में
काश वक़्त पर मेरा इख़्तियार कर लेतीं

आज ये मिरी वहशत भी मिरी ब-दौलत है
मौत पर ज़रा हम को याद यार कर लेतीं

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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं

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'अख़्त्यार' शब्द में शक्ति और स्वायत्तता का भाव है। मूल रूप में, यह निर्णय लेने और अपने कार्यों या परिस्थितियों पर नियंत्रण रखने की क्षमता को दर्शाता है। कविता में, यह शब्द अक्सर इच्छा और संयम के बीच के आंतरिक संघर्ष को दर्शाता है, जो चुनाव और परिणाम की मानवीय स्थिति को उजागर करता है।

कवि 'अख़्त्यार' का उपयोग स्वतंत्रता और सीमा के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह चुनाव के बोझ या निर्णय लेने में मिली मुक्ति को दर्शा सकता है। अक्सर भाग्य के साथ विपरीत रूप में, यह नियति पर मानव नियंत्रण की सीमा पर प्रश्न उठाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'अख़्त्यार' शक्ति और असुरक्षा के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाता है। यह हमें परिभाषित करने वाले विकल्पों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।