
कोई ख़ुशियाँ कोई ख़्वाहिश तो उल्फ़त माँगता कोई
किसी पीपल के ज़रिये से भी मन्नत माँगता कोई
अगर आदम को ख़ुद पे इख़्तियार आ जाता तो मौला
न दुनिया में कोई आता न जन्नत माँगता कोई
— "Nadeem khan' Kaavish"
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