Meaning of

ऐहद

eihd • عہد

वादा; संधि; युग

promise; covenant; era

وعدہ; عہد; دور

Arabic

मोहब्बत वहीं तक है सच्ची मोहब्बत
जहाँ तक कोई अहद-ओ-पैमाँ नहीं है

17

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

64

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मेरी अक्ल-ओ-होश की सब हालतें
तुम ने साँचे में जुनूँ के ढाल दी

कर लिया था मैं ने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
तुम ने फिर बाँहें गले में डाल दी

60

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ये सोच कर कोई अहद-ए-वफ़ा करो हम सेे
हम एक वादे पे 'उम्रें गुज़ार देते हैं

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'ताहिर' उन बे-बस लम्हों का अहद निभाना होगा
उस ने कहा था ख़त मत लिखना ग़ज़लें लिखते रहना

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तलाश हम को किसी भी बदन की है ही नहीं
हवस की भूख हमारे ज़ेहन की है ही नहीं

किसी से बिछड़े तो कोई फ़ना नहीं होता
क़ज़ा की बात तो अब के ज़मन की है ही नहीं

35

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इस अहद में हज़ार के नोटों की क़द्र है
गाँधी भी ख़ुश नहीं थे चवन्नी पे बैठ कर

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जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करें
बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए

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वफ़ा का अहद था दिल को सँभालने के लिए
वो हँस पड़े मुझे मुश्किल में डालने के लिए

27

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ये दाढ़ियाँ ये तिलकधारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं

क़बीले वालों के दिल जोड़िए मेरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं

22

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मोहब्बत वहीं तक है सच्ची मोहब्बत
जहाँ तक कोई अहद-ओ-पैमाँ नहीं है

17

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

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ऐहद शब्द एक गंभीर वादा या बंधन का भार वहन करता है। अपने मूल अर्थ में, यह एक ऐसा संकल्प है जिसे तोड़ा नहीं जा सकता, एक पवित्र बंधन। कविता ने इस शब्द को वफादारी, विश्वास और समय के प्रवाह की थीमों को खोजने के लिए अपनाया है, अक्सर इसे एक प्रकार की पुरानी यादों और लालसा के साथ जोड़ते हुए।

कवि अक्सर 'ऐहद' का उपयोग वादों की पवित्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह समय की अडिग प्रकृति या मानव प्रतिबद्धताओं की नाजुकता का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द विश्वासघात के विपरीत या प्रेम की स्थायी प्रकृति को उजागर कर सकता है।

कविता में, 'ऐहद' अतीत और भविष्य के बीच एक पुल बन जाता है, शब्दों और वादों की स्थायी शक्ति का प्रमाण।