Meaning of

फांँस

faans • فانس

काँटा; छिलका; बाधा

thorn; splinter; obstacle

کانٹا; چھلکا; رکاوٹ

Sanskrit

इस दुनिया में जीते जी
सारी दुनिया हारी है

इक फाॅंसी के फंदे ने
कितनी लाश सॅंभाली है

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ख़राबों में रईसी की गली को छोड़ना अच्छा
गले की फांँस बन जाए तो रिश्ता तोड़ना अच्छा

नहीं अच्छा अगर तुम झोंक दो तूफ़ान में कश्ती
कभी हो छेद कश्ती में अगर तो मोड़ना अच्छा

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तय हुआ था ये कि इक दूजे को भूलेंगे नहीं 
कुछ भी हो जाए मगर फाँसी पे झूलेंगे नहीं

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ख़ुद-कुशी ही थी,पर ऐसा जाल में फांसा मुझे
मर गया वो शख़्स,मेरे हाथ ख़ंजर रह गया

मिलने की उम्मीद से,उस लाश के ताबूत में
जिस्म लेटा था,पर उस का हाथ बाहर रह गया

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देंगें ये अहले जुर्म को राहत
बे कुसूरों को फाँसियाँ देंगें

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कमी से तुम्हारी करें ख़ुद-कुशी गर
तो हर रोज़ फाँसी लटकते रहेंगे

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जिस सेे ये तू ने लगाई फाँसी
वो रस्सी किसी के झूले की थी

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जितना जी चाहे दिलों से खेल लो
पर ख़ुशी फिर भी नहीं होगी तुम्हें

और भी लाखों सजाएँ हैं यहाँ
माना की फाँसी नहीं होगी तुम्हें

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भला आँखों के भँवर में फॅंसे निकलेंगे कहाँ
हमें तो इश्क़ की गहराई का अंदाज़ा नहीं

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फॅंसाकर के मुझ को हमेशा तो ख़ुश रहती है वो
परेशानी भी दोस्ती अच्छे से है निभाती

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इस दुनिया में जीते जी
सारी दुनिया हारी है

इक फाॅंसी के फंदे ने
कितनी लाश सॅंभाली है

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ख़राबों में रईसी की गली को छोड़ना अच्छा
गले की फांँस बन जाए तो रिश्ता तोड़ना अच्छा

नहीं अच्छा अगर तुम झोंक दो तूफ़ान में कश्ती
कभी हो छेद कश्ती में अगर तो मोड़ना अच्छा

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अपने मूल अर्थ में, 'फाँस' एक छोटे, नुकीले वस्तु को संदर्भित करता है जो असुविधा या दर्द पैदा कर सकता है। कविता में, यह शब्द एक बाधा या एक छोटी लेकिन लगातार जलन का विचार उत्पन्न करता है जो शांति को भंग कर सकता है।

'फाँस' का उपयोग कवि अक्सर उन छोटी परेशानियों के प्रतीक के रूप में करते हैं जो दिल को चुभती हैं। यह आत्मा में बसे भावनात्मक काँटों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। कभी-कभी, यह बड़े, अधिक स्पष्ट संघर्षों के विपरीत होता है, जीवन के सूक्ष्म दर्द को उजागर करता है।

कविता में, 'फाँस' असुविधा और सहनशीलता के बीच के नाजुक संतुलन को पकड़ता है। यह हमें उन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण चुनौतियों की याद दिलाता है जो हमारे भावनात्मक परिदृश्य को आकार देती हैं।