जितना जी चाहे दिलों से खेल लोपर ख़ुशी फिर भी नहीं होगी तुम्हेंऔर भी लाखों सजाएँ हैं यहाँमाना की फाँसी नहीं होगी तुम्हें— Ajeetendra Aazi Tamaam