
ख़ुद-कुशी ही थी,पर ऐसा जाल में फांसा मुझे
मर गया वो शख़्स,मेरे हाथ ख़ंजर रह गया
मिलने की उम्मीद से,उस लाश के ताबूत में
जिस्म लेटा था,पर उस का हाथ बाहर रह गया
— Shubham Dwivedi
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