Meaning of

फ़स्साद

fassaad • فساد

दंगा; अशांति; अव्यवस्था

riot; disturbance; chaos

فساد; شورش; انتشار

Arabic

हर दिन एक फ़साद करोगे
क्या दुनिया बर्बाद करोगे

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उरूज पर है अज़ीज़ो फ़साद का सूरज
जभी तो सूखती जाती हैं प्यार की झीलें

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नेता भी डाल देते हैं ऐसे फ़साद में
हिंदू कभी तो वो कभी मुस्लिम विवाद में

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हर मसला हर फ़साद ख़त्म, अम्न होता कू-ब-कू
गर जो तुम मानते ख़ुदा के साथ उस ख़ुदा की भी

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यूँँ भी किसी की आस में बैठेंगे किसी दिन
तन्हाइयों के पास में बैठेंगे किसी दिन

दुनिया के फ़सादात से फ़ुर्सत मिले तो हम
ऐ इश्क़, तिरी क्लास में बैठेंगे किसी दिन

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हासिल नहीं है जंग किसी भी फ़साद का
हासिल भी है अगर तो बराबर की जंग हो

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शहर-ए-फ़साद उस के लिए मसअला नहीं
जिस ने कोई अज़ीज़ गँवाया नहीं अभी

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ख़ुद आप देखें कि किस तरह खप रहा है हर दिन कमाने में ज़र
फ़साद है और कुछ नहीं है बशर की ख़ातिर ज़माने में ज़र

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हर दिन एक फ़साद करोगे
क्या दुनिया बर्बाद करोगे

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उरूज पर है अज़ीज़ो फ़साद का सूरज
जभी तो सूखती जाती हैं प्यार की झीलें

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मूल रूप से, 'फ़स्साद' अव्यवस्था या अराजकता की स्थिति को दर्शाता है, जिसमें अक्सर हिंसा या उथल-पुथल का भाव होता है। कविता में, यह आत्मा या समाज के भीतर के उथल-पुथल को दर्शाता है, जो आंतरिक या बाहरी संघर्षों को प्रतिबिंबित करता है।

'फ़स्साद' का उपयोग कवि अक्सर सामाजिक अशांति या व्यक्तिगत उथल-पुथल को दर्शाने के लिए करते हैं। यह भावनाओं की अराजकता या जीवन में व्यवस्था के टूटने का प्रतीक हो सकता है।

अपने काव्यात्मक सार में, 'फ़स्साद' हमारे भीतर और आसपास की अराजकता के साथ गूंजता है, एक दर्पण जो हम अक्सर सामना करते हैं।