Meaning of

गम़-गुसार

gam-gusaar • غم گسار

सांत्वना देने वाला; दुख बांटने वाला; सहानुभूति रखने वाला

comforter; consoler; one who shares sorrow

غم گسار; تسلی دینے والا; ہمدرد

Persian

चलो की फिर मिलेंगे दोनों पहली बार की तरह
कभी मिले थे दिल जहाँ पे ग़म-गुसार की तरह

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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए

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आए ग़म-गुसार और मुझ से यूँँ की बात
जैसे कोई सोग में करे सुकूँ की बात

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कोई मौक़ा ज़िंदगी का आख़िरी मौक़ा नहीं
इस क़दर ताजील क्यूँ रफ़-ए-कुदूरत के लिए

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दिल ख़ुश-गवार भी है तिरा बे-क़रार भी
कुछ कुछ तो लग रहा है हमें उस्तुवार भी

हरदम उन्हीं के रहते हो घर में घुसे हुए
ऊपर से बन रहे हो बड़े नाक-दार भी

करता हूँ दो शिकार मैं तो एक तीर से
फ़न गीतकार भी है मिरा हुस्न-कार भी

तुम ने नहीं कहा था जहाँ छोड़ दे अभी
ऊपर से कर रहे हो मिरा इंतिज़ार भी

तुम लोग कह रहे हो भला आदमी उसे
मुझ को नज़र से लग रहा है 'ऐब-दार भी

मुझ पर ही मेरी जान का इल्ज़ाम धर दिया
ऊपर से बोलते हो मुझे ग़म-गुसार भी

हरदम नमक लगाना ग़रीबों के ज़ख़्म पर
ये तेरा काम-काज है और रोज़गार भी

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कभी मिरे दिल से पूछो क्या और चाहता है
वही ग़म-ए-इश्क़ होता वो ग़म-गुसार होता

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हर कोई आदमी नहीं होता
आदमी ग़म-गुसार होता है

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दिल और दिल की बेक़रारी के लिए
कोई न आया ग़म गुसारी के लिए

बस तीरगी थी और मैं था दश्त में
फिर दिल जलाया शब गुज़ारी के लिए

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कौन बर्बाद है मेरे जैसा,
दर्द भी ग़म-गुसार से ही मिले

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क्यूँँ हैं मुझ से ये ग़म-ग़ुसार ख़फ़ा
कि मैं तो यारो दर्द लिखता हूँ

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चलो की फिर मिलेंगे दोनों पहली बार की तरह
कभी मिले थे दिल जहाँ पे ग़म-गुसार की तरह

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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए

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'गम़-गुसार' मूल रूप से किसी ऐसे व्यक्ति को संदर्भित करता है जो दुख साझा करता है या कम करता है। कविता में यह सहानुभूति के गहरे बंधनों और साझा दुःख में पाए जाने वाले सांत्वना को दर्शाता है।

कवि 'गम़-गुसार' का उपयोग सहानुभूति और साझा मानव अनुभव के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अलगाव और भावनात्मक अलगाव के विपरीत होता है।

कविता में 'गम़-गुसार' साझा सांत्वना और समझ का प्रतीक बन जाता है।