Meaning of

हिज्र

hijr • ہجر

वियोग; लालसा; अनुपस्थिति

separation; longing; absence

ہجر; جدائی; عدم موجودگی

Arabic

या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ

वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता

ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था
गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता

164

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

140

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हिज्र में तुम ने केवल बाल बिगाड़े हैं
हम ने जाने कितने साल बिगाड़े हैं

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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया
रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया

मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को
या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया

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पहले लगा था हिज्र में जाएँगे जान से
पर जी रहे हैं और भी हम इत्मीनान से

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मोहब्बत दो-क़दम पर थक गई थी
मगर ये हिज्र कितना चल रहा है

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

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ये जो हिजरत के मारे हुए हैं यहाँ
अगले मिसरे पे रो के कहेंगे कि हाँ

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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ

वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

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'हिज्र' शब्द वियोग और लालसा की गहरी भावना को जागृत करता है। कविता में, यह प्रिय से अलग होने के दिल के दर्द को, अनुपस्थिति से छोड़े गए खालीपन को भरने वाली लालसा को पकड़ता है।

कवि अक्सर 'हिज्र' का उपयोग दूरी के दुख और इच्छा की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम की खट्टे-मीठे स्वभाव या पुनर्मिलन की स्थायी आशा का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'हिज्र' अनुपस्थिति में भी प्रेम की स्थायी शक्ति की मार्मिक याद दिलाता है। यह दिल की आशा को थामे रखने की क्षमता को व्यक्त करता है।